Insurance Policy: क्या है भारत में बिमा का इतिहास, कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत

Insurance Policy: बीमा एक ऐसा वित्तीय सुरक्षा उपाय है जो आपको और आपके प्रियजनों को संरक्षित महसूस कराता है। यह आपकी संपत्ति और संपत्ति की सुरक्षा के लिए विभिन्न कवर विकल्प प्रदान करता है। भारत में विभिन्न प्रकार की बीमा पॉलिसियों का विचार करना और उन्हें चुनना महत्वपूर्ण है। बीमा कंपनियों के माध्यम से, आप अपनी जीवन में आने वाली अनाकांगी स्थितियों से बच सकते हैं और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं। बीमा के बारे में सोचते समय यह आवश्यक है कि हम इसे केवल एक डर के रूप में न देखें। बीमा हमारी वित्तीय सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह हमें अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में मदद कर सकता है।

आपके जीवन में किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति के लिए तैयार रहना महत्वपूर्ण है, और इसलिए भारत में विभिन्न प्रकार की जीवन, स्वास्थ्य और सामान्य बीमा पॉलिसियों के बारे में जानकारी रखना भी महत्वपूर्ण है। इससे आप अपने वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं। बीमा के बिना, आपके जीवन की नायिका में अप्रत्याशित घटनाओं के खिलाफ आपकी आत्म-रक्षा की कमजोरी हो सकती है। इसलिए, बीमा कंपनियों का साथ लेना आपके लिए एक वित्तीय और परिवारिक सुरक्षा के रूप में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

Insurance Policy: कैसे हुई शुरुआत

भारत में बीमा का इतिहास बहुत प्राचीन है, जिसका प्रामुख उल्लेख मनुस्मृति, धर्मशास्त्र में याज्ञवल्क्य और अर्थशास्त्र में कौटिल्य के लेखनों में मिलता है। प्राचीन भारतीय समुद्री व्यापार, ऋण, और वाहक अनुबंधों के रूप में बीमा के प्रारंभिक निशानों को संरक्षित रखा गया था। भारत में बीमा का विकास समय के साथ हुआ है और देश में बीमा की शुरुआत अन्य देशों, खासकर इंग्लैंड से प्रभावित हुई है।

भारत में पहली बीमा कंपनी, ओरिएंटल लाइफ इंश्योरेंस, को कोलकाता (वर्तमान कोलकाता) में 1818 में स्थापित किया गया था, लेकिन यह कंपनी 1834 में बंद हो गई।

इसके बाद, वर्ष 1823 में भारत को एक और बीमा कंपनी, बॉम्बे लाइफ़ एश्योरेंस कंपनी, मिली। इसके बाद, 1829 में मद्रास इक्वेटिव गारंटर कंपनी की शुरुआत हुई। 1914 में, भारत सरकार ने बीमा कंपनियों के लेन-देन की प्रक्रिया को प्रारंभ किया और भारतीय जीवन बीमा कंपनी अधिनियम, 1912 का निर्माण किया, जो जीवन व्यवसाय को विनियमित करने के लिए पहला वैधानिक उपाय था।

Insurance Policy: 1956 में आई LIC

  • 1956 में एक अध्यादेश जारी कर राष्ट्रीय जीवन बीमा क्षेत्र को एकीकृत किया गया।
  • उसी वर्ष, जीवन बीमा निगम शुरुआती आवाज में आया।
  • एलआईसी ने 154 भारतीय और 16 गैर-भारतीय बीमाकर्ताओं को समाहित किया।
  • साथ ही, 75 प्रोविडेंट सोसायटियों और 245 भारतीय-विदेशी बीमाकर्ताओं को शामिल किया गया।
  • एलआईसी ने 90 के दशक तक बीमा क्षेत्र में एकाधिकार बनाए रखा।
  • बाद में निजी क्षेत्र के लिए बीमा क्षेत्र को फिर से खोल दिया गया।

कितने तरह के होते है इंश्योरेंस

  • बीमा के विभिन्न प्रकार होते हैं, जैसे जनरल इंश्योरेंस और लाइफ इंश्योरेंस।
  • General Insurance  वाहन, स्वास्थ्य, और मालवाहन जैसे क्षेत्रों को शामिल करता है.
  • Life Insurance व्यक्ति की मौत पर वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है और परिवार की मदद करता है.
  • जनरल इंश्योरेंस नकरात्मक घटनाओं के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है.
  • बीमा प्रकार चयन करते समय वित्तीय आवश्यकताओं और लक्ष्यों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है.

जनरल इंश्योरेंस

  • जनरल बीमा पॉलिसियां मृत्यु के अलावा विभिन्न नुकसानों के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती हैं।
  • इनमें विभिन्न प्रकार की बीमा पॉलिसियां शामिल होती हैं, जैसे कार, स्वास्थ्य, घर, अग्नि, और यात्रा बीमा।
  • ये पॉलिसियां वाहनों, स्वास्थ्य, और संपत्ति के नुकसान के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती हैं।
  • जनरल इंश्योरेंस में मिलने वाली बीमा पॉलिसियां व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा करती हैं।
  • इन पॉलिसियों का चयन व्यक्ति की आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होता है।

लाइफ इंश्योरेंस

  • जीवन बीमा पॉलिसियों का मुख्य उद्देश्य है।
  • आपकी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना।
  • इन पॉलिसियों से बचत के साथ-साथ वित्तीय सुरक्षा भी मिलती है।
  • विभिन्न प्रकार की पॉलिसियां होती हैं।
  • टर्म लाइफ इंश्योरेंस जैसी पॉलिसियां समय-सीमित कवरेज प्रदान करती हैं।
  • संपूर्ण जीवन बीमा पॉलिसियों में आपको जीवन भर कवरेज मिलती है, आपकी मौत के बाद भी।
  • बंदोबस्ती योजनाएं नियमित योगदान के माध्यम से बचत का मौका प्रदान करती हैं।
  • यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान जीवन बीमा और निवेश को एक साथ प्रदान करता है।
  • आपके विभिन्न जीवन के पहलुओं के लिए विकल्प प्रदान करती हैं।
  • ये विकल्प व्यक्तिगत आर्थिक लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करते हैं।

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